महात्मा गफ्फार जी ने अपना कार्यक्षेत्र उत्तराखंड के बाजपुर को बनाया था |यहीं महात्मा गुरदयाल सिंह जी से उन्हें भक्ति का प्रारंभिक प्रशिक्षण प्राप्त हुआ |
निरंकारी बाबा गुरबचन सिंह जी उन दिनों मानव एकता के लिए गंभीर प्रयास कर रहे थे |मिशन का सिद्धांत ही है कि –
एक नूर है सबके अंदर नर है चाहे नारी है ,
ब्राह्मण ,क्षत्रिय ,वैश्य ,हरिजन एक की रचना सारी है|
हिन्दू,मुस्लिम,सिख,ईसाई ,एक प्रभु की सब सन्तान
मानव समझ के प्यार है करना ,हमने सबसे एक समान
इस प्रकार बाबा गुरबचन सिंह जी निरंकारी मिशन के माध्यम से मानव एकता और प्रेम का सन्देश फैला रहे थे |
मुहम्मद गफ्फार जी देवरिया जिले के एक गांव खैरटिया के निवासी थे |उनके पिता श्री अब्दुल हक़ और माता श्रीमती लताबेगम से उन्हें धार्मिक संस्कार प्राप्त हुए |
स्थानीय स्कूल में अध्यापन कर रहे थे |कुछ समय उन्होंने पीलीभीत ,लखनऊ व देवरिया में भी शिक्षण किया |
उन्हें बाबा गुरबचन सिंह जी ने विशालता की और प्रेरित किया और इसका आधार एक निराकार के साक्षात्कार को बनाया |मिशन का यह सिद्धांत ही है कि एक परमात्मा का ज्ञान ही मनुष्य को मुक्ति के पथ पर अग्रसर कर सकता है |
वर्ष 1972 के आस -पास गफ्फार जी निरंकारी मिशन से जुड़े और अध्यात्म का रंग जल्दी ही उन पर चढ़ गया |वास्तविकता तो यह है कि निरंकार जिसे ,ईश्वर,अल्लाह,गॉड,वाहेगुरु आदि अनेक नामो से पुकारा जाता है,वास्तव में सूक्ष्म अहंकार के कारण ही इंसान से दूर है |
गुरदयाल सिंह जी के मानव मन का अहंकार हटाने के अपने ही तरीके थे |गफ्फार जी जब सत्संग में आये तो महात्मा गुरदयाल सिंह जी ने उन्हें सत्संग भवन के दरवाजे साफ़ करने की सेवा सौंपी |एक समर्पित गुरसिख की भॉँति मुहम्मद गफ्फार जी ने सौंपी गयी सेवा पूरी
की |
बाबा गुरबचन सिंह जी छिपी हुई प्रतिभा को उभारने के लिए पूरे प्रयास करते थे |गफ्फार जी में भी खूब प्रतिभा थी | बाबा जी के निर्देशानुसार महात्मा गुरदयाल सिंह जी ने खूब कसकर काम लिया ताकि उनकी प्रतिभा प्रकाश में आये |
अब्दुल हक़ जी यूँ तो एक खेतिहर किसान थे लेकिन गायन और वादन में भी उनकी रुचि थी |गफ्फार खां जी की प्रारंभिक शिक्षा गांव स्थित जीतेन्द्र स्मारक हाई स्कूल ,नारायणपुर कोठी में हुई |गफ्फार खां जी वॉलीबाल के अच्छे खिलाडी थे |इनके हाई स्कूल के प्रधानाचार्य श्री गंगा प्रसाद कुशवाहा थे जिन्होंने गफ्फार जी कंज़ोर आर्थिक अवस्था के कारण उन्हें मदद दी जिसके कारण वे शिक्षा के क्षेत्र में प्रगति कर सके |1972 में उन्होंने इण्टरमेडिएट परीक्षा पास की और अपने छोटे भाई-बहनो को शिक्षित करने में योगदान दिया |
गफ्फार जी विद्यार्थियों को पढ़ाते भी और साथ ही उनमें गायन की प्रतिभा भी थी |यह उनमें पैतृक संस्कार थे |वे खूब सुन्दर गाते थे और अध्यात्मिक गायन से श्रोताओं को खूब प्रभावित करते थे |
जल्दी ही सन्त निरंकारी पत्रिका विभाग में सेवा मिल गयी |आदयणीय निर्मल जोशी जी,मान सिंह जी मान ,वासुदेव राय जी का मार्गदर्शन मिला |वे प्रबुद्ध वक्ता के रूप में सामने आये |वासुदेव राय जी ने विराट हिंदू समाज से जोड़ा ,विराट हिन्दू समाज ने ही उन्हें पंडित की
मुख्यालय में सेवा मिलने से उन्हें अपनी प्रतिभा और निखारने का मौका मिल गया |
पहले कुछ दिन लखनऊ में फिर पीलीभीत ,लखीमपुर में फिर बाजपुर में शिक्षण क्षेत्र में सक्रिय रहे |बाजपुर की फौजी कॉलोनी में उन्होंने एक स्कूल में शिक्षण किया |
1975 में लखनऊ के एक धार्मिक रुचि सम्पन्न व्यक्ति अब्दुल रशीद जी के परिवार में उनका विवाह हुआ |अपने दो पुत्रों ,पुत्रवधुओं और पुत्री के साथ उन्होंने समर्पित जीवन गुजारा
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अंततः 7 मार्च 2025 को उनकी रूह का पंछी उनके शरीर का पिंजरा तोड़कर मुक्ति के विराट आकाश में उड़ चला |उनकी उदार विचारधारा लाखों अध्यात्मप्रेमियों को अपने अनुकरण के लिए प्रेरित करती रहेगी |