उस दोस्त को दोस्त कैसे कहें ?

 उस दोस्त को दोस्त कैसे कहें ?               

प्रस्तुति--रामकुमार सेवक  

हम उन दिनों साकेत के क्षेत्र में रहते थे |हमारे मकान से बस स्टैंड कुछ दूर था |तब मेरी आयु भी कम थी |अब मेरी आयु पचास वर्ष हो चुकी है |तब मेरी आयु 9 वर्ष रही होगी | गर्मी का मौसम था ,मुझे जोरों की प्यास लगी थी ,मेरा ध्यान अपने एक दोस्त की तरफ गया जो कि उधर ही रहता था |मुझे प्यास इतनी जोर  

से लगी थी कि मैं उसके घर में चला गया क्यूंकि हम एक-दूसरे के घर आते-जाते रहते थे |

मैंने उस दोस्त को बता दिया कि मुझे जोरों की प्यास लगी हुई है |

मुझे पूरी उम्मीद थी कि मुझे पानी मिल  जायेगा लकिन उसने कहा-दोस्त मैं तुम्हें पानी नहीं दे सकता क्यूंकि हमारी नौकरानी थोड़ी देर हहले ही बर्तन धोकर गयी है और तुम्हें अगर पानी पीने को दूंगा तो पानी बर्तन दोबारा गन्दा हो जाएगा |इसलिए दोस्त ,मैं तुम्हें पानी नहीं पिला सकता |

इस घटना को घटित हुए 40 वर्ष का समय बीत गया है लेकिन यह घटना मैं कभी नहीं भूल सका |

सोचने की बात यह है कि प्यासे को पानी देना ज्यादा महत्त्व पूर्ण है या गिलास की स्वच्छता ज्यादा महत्व्व पूर्ण है ?

आप किसे महत्वपूर्ण मानेंगे यह बड़ा सवाल है |निरंकारी बाबा हरदेव सिंह जी अक्सर कहा करते कि-

हर गुरमुख महात्मा के पास भूखे के लिए रोटी,प्यासे के लिए पानी और नंगे के लिए कपडा होना चाहिए | 

प्यासे को पानी पिलाना मानव मूल्यों को महत्त्व देना है अन्यथा उस दोस्त को दोस्त कैसे कहें ?